गुरुवार, 24 सितंबर 2020

इंस्टाग्राम से लाखों कैसे कमायें- instagram se paise kaise kamaye 2020

instagram se paise kaise kamaye 2020

इंस्टाग्राम से लाखों कैसे कमायें- instagram se paise kaise kamaye 2020


इंस्टाग्राम से आप इस तरह से पैसे कमा सकते हैं | बहुत सारे लोग परेशान रहते हैं और पूछते रहते हैं कि भाई इंस्टाग्राम से पैसे कैसे कमाए | तो आज मैं आपके लिए पूरा प्रोसेस लेकर आ गया हूं  | आज मैं आपको फुल डिटेल में बताऊंगा कि आप अपने इंस्टाग्राम से पैसे कैसे कमा सकते हैं | दोस्तों आपको बता दूं कि जब 2014-15 में इंस्टाग्राम आया था तब यह सिर्फ एक फोटो शेयरिंग का हीं ऐप था | 2016 के बाद इसकी लोकप्रियता ज्यादा हो गई | तब से इस पर लोग लाखों रुपए कमा रहे हैं |


अब आप कहेंगे कि हम कितना कमा सकते हैं | तो दोस्तों यह निश्चित नहीं है आप इंस्टाग्राम से आप ₹1 से लगाकर ₹1 लाख तक भी कमा सकते हैं | अब आप कहेंगे कि इसके लिए फ्लावर्स ज्यादा होने चाहिए | तभी हम पैसा कमा सकते हैं लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं है | अगर आपके 100-200 फ्लावर्स भी है तब भी आप पैसा  कमा सकते हैं | लेकिन इंस्टाग्राम से पैसा कमाने के लिए आपको मेहनत ज्यादा से ज्यादा करनी होगी | आप सोच रहे होंगे कि मैं फेक फ्लावर्स लाकर पैसे कमा सकता हूं |


तो आप बिल्कुल गलत है | फेक फ्लावर्स से आपके इंस्टाग्राम अकाउंट फ्लावर्स तो होंगे लेकिन ट्रैफिक बिल्कुल भी नहीं आयेगा | जिससे आपको थोड़ी बहुत भी कमाई नहीं होने वाली है | इंस्टाग्राम से पैसे कमाने के लिए आपको रियल ट्राफिक लाना होगा | चलिए पैसा कैसे कमाना है जान लेते है |


1. Affiliate market

Affiliate market  के जरिए इंस्टाग्राम से पैसे कमाना बहुत ही आसान है | इसमें आप किसी दूसरी कंपनी के प्रोडक्ट को सेल करवाते हैं | और उससे जो कमीशन मिलता है वह हमें मिलता है | यानी अगर आप अमेजॉन के थ्रू कोई भी लिंक अपने अकाउंट पर शेयर करते हो तो वह प्रोडक्ट अगर कोई बंदा खरीदता है तो उसमें जो कमीशन बनता है वह आपके अकाउंट में ट्रांसफर कर देता है | इसके लिए आपको अपनी क्रेएक्टिविटी ज्यादा दिखानी होगी | ऐसा नहीं कि आप कुछ भी उठा कर डाल दो और वह आसानी सेल हो जाएगा | आपको एक अच्छा सा प्रोडक्ट लेना है जिसमें  लोग विश्वास करते हो | तभी उसको लोग खरीदेंगे |

2. Sponsorship

स्पॉन्सरशिप के जरिए भी पैसा कमाना बहुत आसान है | इसमें किसी अकाउंट की प्रोफाइल, किसी का फोटो या किसी का ऐड  आप अपने अकाउंट पर चला सकते हैं | इसके बदले आप उनसे परचेज कर सकते हैं | यह आप पर डिपेंड रहेगा कि किससे कितना परचेज करना है | जब आपके फ्लावर्स ज्यादा होंगे आपके अकाउंट में ट्राफिक ज्यादा आएगा तो आपको बहुत बड़ी-बड़ी स्पॉन्सरशिप मिलेंगी | वह लोग अपने उस प्रोडक्ट को प्रमोट करवाना चाहते हैं | इसीलिए जब वह आपसे कांटेक्ट करते हैं तब आप उसको प्रमोट करवाने के बदले में अच्छी खासी रकम ले सकते हैं  | इसे ही स्पॉन्सरशिप कहते हैं |

3.  अपना प्रोडक्ट सेल करें 

मान के चलिए आपके पास किसी प्रकार की कंपनी है या आप कोई दुकानदार है | जो बिल्कुल भी नहीं चल रही है | तो आप अपनी ही कंपनियां दुकान को प्रमोट कर सकते हैं | इंस्टाग्राम के थ्रू जब आपके इंस्टाग्राम ट्राफिक ज्यादा आएगा | तब आप अपनी कंपनी का कोई भी प्रोडक्ट अपने अकाउंट पर शेयर कर सकते हैं | और अपने  फ्लावर से चेक खरीदने के बारे में कह सकते हैं | इससे ज्यादा से ज्यादा लोगों ने दिखेगा | और उसको ज्यादा से ज्यादा लोग खरीदेंगे | इस प्रकार आप अपने खुद के प्रोडक्ट को भी प्रमोट कर सकते हैं | और अच्छे खासे अपने बिजनेस से  पैसे कमा सकते हैं |




इंटरनेट स्पीड बढ़ाने का तरीका - internet speed kaise badhaye

internet speed kaise badhaye


इंटरनेट स्पीड बढ़ाने का तरीका - internet speed kaise badhaye

आज के समय में हर कोई इंटरनेट यूज करता है | लेकिन उसका सही से मजा नहीं रह पाता | क्योंकि बहुत सारे लोगों को यह समस्या रहती है कि उनकी इंटरनेट स्पीड बहुत स्लो होती है | और वह कुछ भी डाउनलोड या अपलोड करना चाहते हैं इंटरनेट पर तो वह नहीं कर पाते | बहुत सारे लोग पूछते रहते हैं कि भाई  इंटरनेट स्पीड बढ़ाने का कोई तरीका है | जी हां आज मैं आपको बताने वाला हूं इंटरनेट स्पीड बढ़ाने के कुछ  ऐसे तरीके जिनको अपने फोन में अप्लाई करने के बाद आप की इंटरनेट स्पीड एक रॉकेट की तरह चलने लगेगी | और आप हर एक बड़ी से बड़ी फाइल को डाउनलोड और अपलोड कर पाएंगे | तो चलिए शुरू करते हैं |


आज मैं आपको इंटरनेट स्पीड बढ़ाने के 2 तरीके बताने वाला हूं |व् जिसमें पहला तरीका आपके इंटरनेट की स्पीड 50% बड़ा देगा | और दूसरा तरीका आपके इंटरनेट स्पीड को 100% बड़ा देगा | 

इंटरनेट स्पीड बढ़ाने का पहला तरीका

दोस्तों सबसे पहले आपको अपने फोन की सेटिंग में जाना है | अब आप सोच रहे होंगे यह तो वही तरीका है जो हर कोई बताता है | लेकिन मैं आपको कुछ अलग तरीके से बताने वाला हूँ | इसलिए जानकारी को पूरा पढ़ें और ध्यान पूर्वक फोन की सेटिंग में आने के बाद आपको कनेक्शन सेटिंग में जाना है | इसके बाद मोबाइल नेटवर्क के ऑप्शन पर क्लिक करना है | इसमें आपको नेटवर्क मोड एक ऑप्शन मिल जाएगा | इसके अंदर 2G, 3G, 2G-3G, 4G, Auto ऑप्शन होते हैं | इसमें से आपको Auto  का ऑप्शन हमेशा सिलेक्ट रखना है | क्योंकि अगर कोई एरिया में आपके 4G नेटवर्क नहीं है | तो आपको 2G-3G में से एक कनेक्शन मिल जाएगा | और आपकी इंटरनेट चलती रहेगी |

इसके बाद आपको नीचे एक्सेस प्वाइंट नेम  (Access point names) में जाना है | इसके अंदर आपकी जो सिम है | उस से रिलेटेड कनेक्शन की सारी जानकारी आ जाएगी | बहुत सारे लोग बोलते हैं कि इसका नेम चेंज करने से इंटरनेट की स्पीड बढ़ जाती है | तो यह बिल्कुल गलत है | ऐसा कुछ भी नहीं होता है | इसमें जो अलग सेटिंग होती है | वह मैं बताता हूं | आपको नीचे जाना है | आपको एक ऑप्शन मिलेगा APN Protocol जिसमें आपको (IPv4/IPv6) के ऑप्शन को हमेशा सेलेक्ट रखना है | इसके अलावा अगर आप रोमिंग में हो तो APN Roaming Protocol में भी (IPv4/IPv6) के ऑप्शन को सेलेक्ट करना है |

इसके नीचे आपको एक बेरियर ( Bearer) का ऑप्शन मिलेगा | जिसमें आपको Unspecified ऑप्शन सेलेक्ट मिलेगा | इसके साथ ही आपको LTE के ऑप्शन को भी सिलेक्ट कर लेना है | बस इस सेटिंग में इतना ही करना है | अब आपको ऊपर की तीन लाइन के ऑप्शन पर क्लिक करके सेव कर देना है |

अब आप ट्राई कर सकते हो कि इस सेटिंग के बाद आपके इंटरनेट की स्पीड पर कुछ फर्क पड़ा है या नहीं |

2. इंटरनेट स्पीड बढ़ाने का दूसरा तरीका

दोस्तों आप चाहे एयरटेल, जिओ, आइडिया, वोडाफोन  मैं से कोई भी सिम यूज करते हैं | आपके इंटरनेट की स्पीड 100% बड़ेगी | इसके लिए आपको करना क्या है | आप जिस भी कंपनी के सिम यूज कर रहे हैं | उस कंपनी के कस्टमर केयर को फोन करना है | रुको  मैं आपको बताता हूं कि उनसे बात क्या करनी है | जब आप कस्टमर केयर को फोन करें तब उनसे अपनी प्रॉब्लम बताएं | सबसे बड़ी आपकी प्रॉब्लम क्या होगी कि आपका  गूगल नहीं चल रहा होगा या यूट्यूब नहीं चल रहा होगा या फिर फेसबुक नहीं चल रहा होगा | तो ऐसे में आप कस्टमर केयर से शिकायत कर सकते हैं | वह आपके इन सभी प्लेटफार्म की इंटरनेट स्पीड को कंट्रोल करते हैं | तो ऐसे में आप जो भी प्लेटफार्म बताएंगे कि हमारे वहां यह समस्या है यहाँ पर यह प्लेटफार्म  नहीं चल रहा है | तो वह आपकी उन सभी समस्याओं का समाधान करेंगे |

तो आज मैंने आपको इंटरनेट स्पीड बढ़ाने के 2 तरीके बताएं | आप इन दोनों तरीकों को जरूर ट्राई करें | आपकी इंटरनेट स्पीड 100% बड़ जाएगी |



 



मंगलवार, 15 सितंबर 2020

ब्लॉगिंग क्या है- blogging kya hai in hindi

blogging kya hai

दोस्तों ब्लॉगिंग क्या है इस से पैसे कैसे कमाए जाते हैं
| ब्लॉगिंग एक पैसा कमाने का बहुत ही सरल जरिया है | इससे पैसा कमाना बहुत ही आसान है | लेकिन  उससे पहले यह जानना जरूरी है कि ब्लॉगिंग क्या है  इसमें हम कैसे काम करेंगे |

दोस्तों जब आप गूगल पर अपनी आवश्यकता के अनुसार कोई भी कीवर्ड सर्च करते हैं जैसे- "Health tips" तो गूगल हमारे सामने बहुत सारे परिणाम लेकर आता है |  और हमें हेल्थ टिप्स से रिलेटेड जानकारी मिल जाती है | दोस्तों क्या आपने सोचा है कि यह जानकारी कहां से आती हैं |आखिर इंटरनेट पर यह जानकारी कौन उपलब्ध कराता है | इंटरनेट पर उपलब्ध इस जानकारी को ही ब्लॉगिंग कहते हैं | ब्लॉगिंग के जरिए हम अपने मन की कोई भी स्टोरी लिख सकते हैं | और उसे लोगों से साझा कर सकते हैं | और साथ ही आपकी स्टोरी के साथ गूगल एड्स बेंचता है | जिससे गूगल  को अच्छी खासी अर्निंग होती है | उस आमदनी को कुछ परसेंट गूगल अपने पास रख लेता है | और बाकी लिखने वाले के खाते में ट्रांसफर कर देता है |

नहीं समझ में आया तो मैं आपको फिर से समझा रहा हूं | मान के चलिए आप एक मैकेनिक या इंजीनियर है |  आपको इससे रिलेटेड बहुत सारा ज्ञान है | और वह ज्ञान आप किसी को देना चाहते हैं | किसी को समझाना चाहते हैं | तो आप अपने इस ज्ञान को एक ब्लॉग यावेबसाइट के जरिए लोगों को दे सकते हैं |

ब्लॉगिंग शुरू करने के कुछ दिन बाद ही आपको गूगल ऐडसेंस की तरफ से एड मिल जाएंगे | और उनका ऐड्स को अपनी पोस्ट या आर्टिकल में लगाकर आप पैसे कमा सकते हैं | अन्य सोर्सेस से भी पैसे कमा सकते हैं | लेकिन ऐडसेंस से पैसे कमाने का सबसे बेहतरीन ऑप्शन होता है | इसके जरिए आपको बहुत ज्यादा कमाई होती है |

आपको बता दो कि आप इंटरनेट पर उसी जानकारी को शेयर करें जिसमें आपको इंटरेस्ट हो | यानी कि अगर आप एक डॉक्टर ने तो आप हेल्थ रिलेटेड ही जानकारियां उपलब्ध कराएं | आप इंजीनियर या टेक्नोलॉजी में इंटरेस्ट है तो  आप इन टॉपिक पर भी अपना ब्लॉग बना सकते हैं | कहने का मतलब है कि आपको जिस टॉपिक में लिखना बहुत अच्छा लगता हो |  उस टॉपिक की कैटेगरी के अनुसार ही अपना ब्लॉक बनाएं |

अब बात आती है कि मैं एक टेक्निकल हूँ | मुझे टेक से रिलेटेड बहुत सारा ज्ञान है | लेकिन मैं ब्लॉग नहीं जानता कि कैसे बनाएं | और उस पर काम कैसे करें | तो दोस्तों आप घबराइए मत हमें कीजिए फॉलो | और बने रहिए हमारे ब्लॉग पर और मैं आपको ब्लॉग से रिलेटेड सारी इनफार्मेशन उपलब्ध कराता रहूंगा | और आपको कभी पीछे नहीं हटने दूंगा |

Blog कैसे बनाएं

दोस्तों ब्लॉग को आप दो तरीकों से स्टार्ट कर सकते हैं | सबसे पहला फ्री वाला ब्लॉग और दूसरा प्रीपेड ब्लॉग |

फ्री ब्लॉग- फ्री ब्लॉग में आपको किसी भी प्रकार का खर्चा नहीं होने वाला है | इसमें सिर्फ आप अपनी जीमेल आईडी डाल कर आप अपना एक ब्लॉग तैयार कर सकते हैं | और अपनी जानकारी लोगों में साझा कर सकते हैं |

प्रीपेड ब्लॉग- इसमें सबसे पहले आपको एक डोमेंन की आवश्यकता होती है | यह डोमेन आपको गोडैडी जैसी बड़ी बेसाइड मिल जाएगा | यह प्रीपेड होता है | अब आप कहेंगे कि मैं डोमेन नहीं जानता हूं कि आप कैसा होता है | दोस्तों आपने हर एक वेबसाइट के लास्ट में देखा होगा .com, .in, .org लगा होता है | यही डोमेन होता है | इससे आपकी वेबसाइट एक प्रोफेशनल वेबसाइट बन जाती है | यानी अगर आप की वेबसाइट techhindi  के नाम से है | तो जब आप डोमेन खरीदेंगे  तब आपको .com  मिल जाएगा | तब जाकर आप की वेबसाइट techhindi.com  के रूप में तैयार हो जाएगी |

यही अगर आप फ्री वाला  ब्लॉग यूज करते हैं | तो इसमें आपको .com  तो मिलेगा लेकिन उससे पहले आपको blogspot  लगा मिलेगा | लेकिन हम फिर भी इन दोनों ब्लॉग से ही पैसे कमा सकते हैं |

 ब्लॉग पर काम कैसे करें

दोस्तों काम करने के लिए आपको अपना एक यूनिकॉर्टिकल तैयार करना है | आपको किसी भी दूसरे का आर्टिकल चोरी नहीं करना है | यानी आपको जो भी ज्ञान देना है | वह अपनी तरफ से एक प्रकार का यूनिक कंटेंट होना चाहिए | तभी आपको गूगल एड्स देगा | और उनको लगा कर आप कमाई कर सकते हैं | इसीलिए ध्यान रहे कि आप जो भी जानकारी दें अपनी तरफ से सही जानकारी हो |

तो बने रहीये हमारे साथ अगर आप ब्लॉगिंग स्टार्ट करना चाहते हैं तो आप स्टार्ट कर सकते हैं | और घबराने की कोई बात नहीं है | हम आपको ब्लॉग से रिलेटेड सारी जानकारी उपलब्ध  कराते रहेंगे |

 


रविवार, 6 सितंबर 2020

कंप्यूटर नेटवर्क के विभिन्न कम्पोनेंट्स- components of computer in hindi

 

components of computer in hindi

कंप्यूटर नेटवर्क के विभिन्न कम्पोनेंट्स- components of computer in hindi

कंप्यूटर नेटवर्क के सम्बन्ध में अध्यन से पूर्व उससे सम्बंधित कुछ महत्वपूर्ण कम्पोनेंट्स का ज्ञान होना आवश्यक है |

(1) सर्वर –

नेटवर्क के मुख्य कंप्यूटर को सर्वर कहते है | यह सेन्ट्रल कंप्यूटर होता है | और इसी से सभी कंप्यूटर जुड़े होते हैं | सर्वर के द्वारा ही कंप्यूटर नेटवर्क के प्रोग्राम को आपरेट किया जाता है |

(2) नोड –

नेटवर्क के सर्वर से जुड़े प्रत्येक कंप्यूटर को नोड कहते हैं | प्रत्येक नोड का एक निश्चित नाम अथवा पहचान होती है |

(3) क्लाइन्ट –

इसका अभिप्राय नेटवर्क पर कार्य कर रहे कंप्यूटर से है | यह एक कंप्यूटर क्लाइन्ट की भूमिका निभाते हुए दूरदर्शी स्थानों पर स्थित सर्वर के साथ इनफार्मेशन व फीचर्स का साझा उपयोग करता है |

(4) केबल –

नेटवर्क में कंप्यूटर को आपस में जोड़ने वाले तारो को केबल कहते हैं | यह ट्विस्टेड पेयर अथवा कोएक्सियल तथा फाइबर आप्टिक प्रकार की हो सकती हैं |

(5) टोपोलॉजी –

कंप्यूटर नेटवर्क में कंप्यूटर को जोड़ने की व्यवस्था को टोपोलॉजी कहते हैं | कंप्यूटर नेटवर्क की अनेक टोपोलॉजी होती हैं | इनके बारे में आगे विस्तार से बताया जायेगा |

(6) हब –

नेटवर्क में अलग-अलग कंप्यूटर के केबल को एक साझे सेंटर से जोड़ने का कार्य हब के द्वारा किया जाता है | यह एक आयताकार बाक्स होता है | जिसमे प्लग या जैक लगाने के लिए स्लॉट बने होते हैं जिन्हें पोर्ट कहा जाता है |

(7) नेटवर्क ऑपरेटिंग सिस्टम  -  

नेटवर्क ऑपरेटिंग सिस्टम को संक्षेप में नॉस के नाम से जाना जाता है | यह एक प्रकार का ऑपरेटिंग सिस्टम है जो लोकल एरिया नेटवर्क से कंप्यूटर तथा अन्य डिवाइसेस को जोड़ने के लिए कुछ विशेष फंक्शन रखता है | कुछ ऑपरेटिंग सिस्टम जैसे यूनिक्स में नेट्वर्किंग फंक्सन पहले से ही उपस्थित होते हैं |

नेटवर्क ऑपरेटिंग सिस्टम शब्द का प्रयोग सामान्यतः एक जैसे साफ्टवेयर के लिए किया जाता है | जो एक फंडामेंटल ऑपरेटिंग सिस्टम में नेट्वर्किंग प्रोपर्टीज को जोड़ता है | माइक्रोसोफ्ट विंडोज सर्वर तथा विन्डोज एन. टी. नेटवर्क ऑपरेटिंग सिस्टम के उदहारण हैं |

(8) एन. आई. सी. –

एन. आई. सी. का विस्तरित नाम नेटवर्क इंटरफ़ेस कार्ड होता है | नेटवर्क इंटरफ़ेस कार्ड एक प्रकार का एक्सपेंशन बोर्ड होता है | जो कंप्यूटर के साथ कम्बाइन करके उसे एक नेटवर्क से जोड़ देता है | अधिकतर नेटवर्क इंटरफ़ेस कार्ड एक विशेष प्रकार के नेटवर्क, प्रोटोकॉल तथा मीडिया के लिए डिजाइन किए जाते हैं | याद्यापि कुछ कार्ड कई असमान नेटवर्क में भी प्रयोग किए जाते हैं |

(9) प्रोटोकॉल –

कंप्यूटर नेटवर्क सुचारू रूप से कार्य करते रहे इसके लिए नेटवर्क में उपस्थित इनफार्मेशन को; जिन्हें कंप्यूटर की भाषा में Data Traffic कहते हैं; कुछ नियमो का पालन करना पड़ता है | जिन्हें प्रोटोकॉल कहते हैं | प्रोटोकॉल के पालन के द्वारा नेटवर्क का प्रत्येक कंप्यूटर एक दूसरे को मेसेज भेज सकता है | एक दूसरे में स्टोर प्रोग्राम तथा डाटा के प्रयोग के साथ-साथ उनसे जुड़े डिवाइसेस का प्रयोग कर सकता है |

(10) ब्रिज –

इसके माध्यम से दो लोकल एरिया नेटवर्क (LAN) को आपस में केवल तब जोड़ा जा सकता है | जबकि उनके साफ्टवेयर एक समान हो तथा कंप्यूटर असमान हो | एक बार जब ब्रिज के माध्यम से दो लैंस (LAN’S) को आपस में पोर्ट के माध्यम से जोड़ दिया जाता है तो विभिन्न डिवाइसेस आपस में आसानी से जुड़ जाती हैं | ब्रिज विशेषतया डाटालिंक स्तर पर कार्य करता है |

नोड्स की संख्या जब अधिक होती है | तब डाटा स्थान्तरण की गति कम हो जाती है | इस स्थित में ब्रिज का प्रयोग का विभिन्न लैंस को आपस में जोड़ा जाता है | फलस्वरूप डाटा स्थान्तरण की गति तीव्र हो जाती है |

(11) रूटर्स –

रूटर्स का प्रयोग तब किया जाता है जब अत्यंत जटिल नेटवर्कों को आपस में जोड़ना होता है; जैसे – इंटरनेट प्रोटोकॉल इसके माध्यम से यदि डाटा भेजना है तो एकसमान प्रोटोकॉल का होना आवश्यक है | रूटर, कंप्यूटर व उनमे स्थित साफ्टवेयर भिन्न-भिन्न होने पर भी कार्य कर सकता है | यह ब्रिज की तुलना में अच्छा कार्य करता है | यह डाटा ट्रान्सफर के लिए छोटे रास्तों का चयन करता है | जिससे कम से कम समय में अधिक कार्य कर सके |

(12) रिपीटर –

जब इनफार्मेशन के सिग्नल एक स्थान से दूसरे स्थान पर भेजे जाते हैं तो सिग्नल्स दुर्बल हो हेट हैं | उन्हें संव्धित करने के लिए रिपीटर का प्रयोग किया जाता है | एक नेटवर्क से प्राप्त सिग्नल रिपीटर द्वारा दूसरे नेटवर्क को भेजते हैं | यह सिग्नल डाटा या साउंड के रूप में हो सकते हैं | रिपीटर सामान्यतः बिट स्तर पर कार्य करता है | रिपीटर दो नेटवर्क के मध्य एक सामान कार्य कर सकता है | जबकि दोनों नेटवर्क की कार्य प्रणाली एक समान हो; अर्थात कंप्यूटर व् उसमे स्थित सोफ्टवेयर एक समान हो |

(13) गेटवे –

गेटवे की कार्य प्रणाली रूटर्स से उच्च स्तर की होती है | यह दो भिन्न प्रकार के नेटवर्कों को भी आपस में कम्बाइन कर सकता है | यदि आपके पास ऐसा नेटवर्क है जिसके विभिन्न उपखंड हैं, जैसे एक आपके पास उनिक्स का सिस्टम है | और दूसरा विंडो का, तब इनके बीच नेट्वर्किंग के लिए गेटवे का प्रयोग किया जाता है | गेटवे एक ऐसा सिस्टम है | जिसमे विशेष प्रकार के हार्डवेयर व साफ्टवेयर होते हैं |



कंप्यूटर की सीमाएँ- computer ki simaye

computer ki simaye


कंप्यूटर की सीमाएँ- computer ki simaye

कंप्यूटर के नाम से ही पता चलता है कि इससे हम जो भी कार्य करने वाले है वह सरलता से और बिना किसी गलती के होने वाला है | इस बात को लेकर किसी को कुछ संदेह नहीं होता है | कंप्यूटर मानव जीवन को सरल और सहजता लाने में अपना बहुमूल्य योगदान निभाया है | कंप्यूटर की इन्ही विशेषताओ के कारण ही आज हम लोग इतने शिखर तक पहुचे हैं | यह केवल एक मशीन की तरह माननीय पूर्णतयः पालन करता है | इसका निर्माण मनवो ने ही किया है | परन्तु इसकी बुधिमत्ता के आगे मानव की बुधि की कुछ कार्य प्रणाली सीमाए हैं | इनको जानना हमारे लिए बहुत आवश्यक है | चलिए जान लेते हैं |

कंप्यूटर की सीमाएँ

1. बुधिमत्ता का अभाव

कंप्यूटर का उपयोग केवल सीमित कार्यो के लिए संभव होता था | इसको हम मानवीय सामान्य बोध और दर्शन के प्रयोग में नहीं ला सकते थे | इससे कोई भी हल निकालना संभव नहीं होता था | क्योकि यह एक मशीन कि तरह ही कार्य करता था | इन निर्देशों को छोड़कर और कोई कार्य नहीं कर सकता | इससे ज्ञात होता है कि कंप्यूटर का दिमाग किसी मानव से कम नहीं है | हालाँकि इसे कृतिम रूप से बनाया गया है लेकिन दिमाग मनव की तरह विकसित किया गया है | इसे मानव के रूप मर वैज्ञानिको ने ही विकसित किया है | जब इनको कुछ ज्यादा सफलता मिली तब कंप्यूटर की बुधिमत्ता कुछ सीमित तक आ गयी | परन्तु फिर भी इसकी मानवीय बुधिमत्ता से तुलना नहीं हो पायेगी |

2. भावनाओ का अभाव

कंप्यूटर में मानव की तरह बुधिमत्ता तो होती है | लेकिन यह मानव कि तरह उनकी भावनाओ को नहीं समझ सकता | इसके जरिये हम अपने विचारो को आदान प्रदान कर सकते है | लेकिन लेकिन उन विचारो में निहित भावनाओ को नहीं दिखा सकते जैसे- अगर हम किसी को ईमेल के माध्यम से बधाईयाँ तो दे सकते हैं | लेकिन उन बधाईयों में अपनी भावनाओ को सम्मलित नहीं कर सकते हैं |

3. सामान्य बोध का अभाव

कंप्यूटर को वैज्ञानिको ने ही विकिसित किया है | इसलिए यह इनके दिमाग के आगे कुछ भी नहीं यह कुछ सीमा तक ही मानवों के समान व्यवहार कर सकता है | जिस प्रकार कोई भी रचना अपने रचानकर से बड़ी नहीं हो सकती | इसलिए कंप्यूटर और मानव की बुधिमत्ता में अंतर है | इनमे सोचने की क्षमता नहीं होती है यह मानव के सामान किसी भी प्रकार को बोध नहीं करता है | कंप्यूटर कोई भी कार्य करता है सत्य है असत्य यह मानव की तरह नहीं समझता है | यह सिर्फ अपने डाटा को हो प्रदर्शित करता है गलती का निस्तारण मानव ही करता है | कंप्यूटर कदापि नहीं कर सकता |



शनिवार, 29 अगस्त 2020

WWW क्या है और कैसे काम करता है - www kya hai in hindi

www kya hai

WWW क्या है और कैसे काम करता है | www के गुण क्या हैं | यह इंटरनेट में क्या भूमिका निभाता है | इंटरनेट इतने चरम शीर्ष तक कैसे पहुंचा (www kya hai hindi)

www एक ऐसा माध्यम है जिसकी सहायता से एक सूचना बहुत सारे कंप्यूटर पर पढ़ी या सुनी जा सकती है | इसका पूरा नाम वर्ल्ड वाइड वेब है | इसके माध्यम से कंप्यूटर पर उपलब्ध सूचनाओ को परस्पर सम्बंधित किया जाता है | इसलिए एक ही सूचना से सम्बंधित जानकारी किसी दूसरे कंप्यूटर पर होती है |

WWW क्या है और कैसे काम करता है -

इसका अहम रोल जब कोई सूचना को विस्तार से जानने के लिए कर्सर को उस सूचना पर ले जाता है तब उसका कलर बदल जाता है | इसका मतलब यहाँ पर इससे सम्बंधित और विस्तार से जानकारी है | जब यूजर उस पर क्लिक करता है तब वह उस जानकारी या सूचना को विस्तार से जान पाता है | फिर चाहे कंप्यूटर देश में हो विदेश में हो या फिर किसी महादीप पर हो | सारे कंप्यूटर पर यह एक साथ जानकारी को प्रदर्शित करता है | इस प्रकार विश्व के कंप्यूटर से सूचना प्राप्त करने के इस साधन का नाम, वर्ल्ड वाइड वेब, पड़ा |

इसके अन्तर्गत सूचनाओ को देखने के लिए सबसे पहले ब्राउसर साफ्टवेयर का विकास किया गया | क्योकि इसके बिना इसका चलना असंभव था | सबसे पहले Mosaic साफ्टवेयर को बनाया गया | फिर बहुत सारी कंपनियों ने अपना अपना ब्राउसर बनाया |

www kya hai -

इसके अंतर्गत जब कोई डॉक्यूमेंट को देखा जा रहा होता है और उसकी जानकारी किसी अन्य जगह पर होती है | तब उसका रंग बदल जाता है | जिससे यूजर जान पाए कि इसकी जानकी और विस्तार से है | और वह कर्सर को उस लाइन पर क्लिक करके उस जानकारी को विस्तार से हासिल कर सकता है |

इसके अंतर्गत टेक्स्ट, इमेज, ऑडियो, वीडिओ साउंड आदि के रूप में जानकारियां उपलब्ध होती है |

www से पहले इन्टरनेट केवल लिखित सूचनाओ के लिए प्रयोग में लाया जाता था | इसलिए इन्टरनेट बहुत कमजोर थी | www के बाद इन्टरनेट चरम शीर्ष तक पहुच गया | क्योकि इसकी प्रवृति ग्राफिक- आधारित है |

www के गुण (Properties of www)

1. यूजर फ्रेंडली

www  ज्यादातर सरलता से ब्राउसर के साथ ही कार्य करता है | इसके बिना इसका चलना असंभव है |

2 . मल्टीमीडिया डाक्यूमेंट्स

इस पर सभी सूचनाये जैसे टेक्स्ट, ऑडियो, वीडिओ, एनीमेशन आदि सभी एक साथ उपलब्ध हो सकती है | और यह वेब पेजों में देखी जा सकती है | वेब पेज इंटरनेट पर उपस्थित एक डाक्यूमेंट्स है | जिस पर ये सारी सूचनाये देखी जा सकती हैं | इसके लिए इन्टरनेट यूजर्स को पूर्ण व्यवस्था करनी होती है |

3. हाइपरटैक्स्ट तथा हाइपरलिंक

हाइपरटैक्स्ट फाईल का वह डाक्यूमेंट्स है जिसमे ऑडियो, विडिओ, ग्राफिक इमेज, टेक्स्ट आदि संबधित फाईले अथवा इन्टरनेट से जुड़ने के लिए डायनैमिक लिंक सम्मलित करते है | इन डायनैमिक लिंक को ही हाइपरलिंक कहते हैं |

4. इंटरेक्टिव

www, अपने पेजों के साथ, यूजर्स तथा सर्वरों के मध्य निम्नलिखित विधियों द्वारा इंटरेक्टिव करने में सहायता करता है ---

·         हाइपरलिंक

·         इनपुट बाक्स जैसे – रेडियो बटन, चैक बाक्स, टेक्स्ट बाक्स आदि |

5. फ्रेम

www, फ्रेमो के माध्यम से भी कार्य करता है | फ्रेम, एक वेब पेज पर एक से अधिक स्वतंत्र रूप से कंट्रोल करने योग्य अनेक भागो का प्रदर्शन होता है |

www की कार्य प्रणाली

यह एक बेसिक यूनिट वेब पेज होता है | जिसमे सूचनाओ को एकत्रित किया जाता है | यह पेज HTML Language में लिखे जाते हैं | इस HTML के प्रयोग द्वारा किसी बेब पेज को जोड़ा जा सकता है | इसके लिए हाइपरलिंक का प्रयोग किया जाता है | इसके साथ वेब पेज में ऑडियो, विडियो, टेक्स्ट, ग्राफिक इमेज आदि को भी जोड़ा जा सकता है | किसी एक HTML से दुसरे HTML जाने के लिए url का प्रयोग करते है | url, वेब में उपलब्ध विभिन्न पेजों अथवा वेब पेजों से सम्बद्ध रिसोर्सेस जैसे- ऑडियो, विडियो, टेक्स्ट, ग्राफिक इमेज आदि का विशिस्ट पता होता है |

एक ही वेब सर्वर पर कई साईट हो सकती है | इसलिए वेब पेजों में वेब सर्वर स्टोर किया जाता है | ये साईट किसी भी स्थान से हो | वेब सबको सुपोर्ट करता है | इसको चलाने के लिए इन्टरनेट यूजर को अपने कंप्यूटर में ब्राउसर तथा इन्टरनेट कनेक्शन की अवस्यकता पड़ती है | इन्टरनेट यूजर ब्राउसर की सहायता से वेब सर्वर को एक्सेस करके वेब पर उपस्थित सभी जानकारियों को हासिल कर सकता है |


Tags:-

1. www kya hai in hindi

2. Web browser kya hai

3. Internet kya hai

4. web page kya hai

5. Url kya hai

6. Website kya hai

7. ww kya hota hai

 



गुरुवार, 27 अगस्त 2020

Top 50 Full form of computer- computer ka full form in hindi

Top 50 Full form of computer- computer ka full form in hindi

दोस्तों कंप्यूटर थ्योरी के साथ साथ हमें कंप्यूटर्स के फुल फॉर्म भी जानना जरुरी होता है | क्योंकि बहुत सारी परीक्षाओं में कंप्यूटर प्रैक्टिकल और थ्योरी के साथ साथ फुल फॉर्म भी पूछे जाते हैं | और तब हम फस जाते हैं | तो अगर आप भी कंप्यूटर ट्रिपल सी जैसी बड़ी परीक्षाएं देना चाहते हैं | और अच्छे नंबर से पास होना चाहते हैं तो इन फुल फॉर्म्स को रट लो |

Top 50 Full form of computer- computer ka full form in hindi


1. MICR का फुल फॉर्म क्या होता है ?

M - Magnetic

I - Ink

C - Character

R - Reader

2. MODEM का फुल फॉर्म क्या होता है ?

MO - Modulator

DEM - Demodulator

3. MS ACCESS का फुल फॉर्म क्या होता है ?

MS - Microsoft

ACCESS - Access

4. MS-DOS का फुल फॉर्म क्या होता है ?

MS - Microsoft

D - Disc

O - Operating

S - System

5. MS-EXCEL का फुल फॉर्म क्या होता है ?

MS - Microsoft

EXCEL - Excel

6. MS-Windows का फुल फॉर्म क्या होता है ?

MS - Microsoft

WINDOWS - Windows

7. MS-WORD का फुल फॉर्म क्या होता है ?

MS - Microsoft

WORD - Word

8. MTNL का फुल फॉर्म क्या होता है ?

M - Mahanagar

T - Telephone

N - Nigam

L - Limited

9. NAL का फुल फॉर्म क्या होता है ?

N - National

A - Aerospace

L - Laboratories

10. NIC का फुल फॉर्म क्या होता है ?

N - Network

I - Interface

C - Card

11. OCR का फुल फॉर्म क्या होता है ?

O - Optical 

C - Character

R - Reader

12. OMR का फुल फॉर्म क्या होता है ?

O - Optical

M - Mark

R - Reader

13. OS का फुल फॉर्म क्या होता है ?

O - Operating

S - System

14. PC का फुल फॉर्म क्या होता है ?

P - Personal

C - Computer

15. PDL का फुल फॉर्म क्या होता है ?

P - Program

D - Design

L - Language

16. PL 1 का फुल फॉर्म क्या होता है ?

P - Programming

L 1 - Language 1

17. POS का फुल फॉर्म क्या होता है ?

P - Point

O - of

S - Seles

18. PROM का फुल फॉर्म क्या होता है ?

P - Programmable

R - Read 

O - Only 

M - Memory

19. PSTN का फुल फॉर्म क्या होता है ?

P - Public

S - Switched 

T - Telephone

N - Network

20. RAM का फुल फॉर्म क्या होता है ?

R - Ramdom

A - Access 

M - Memory

21. ROM का फुल फॉर्म क्या होता है ?

R - Read 

O - Only

M - Memory

22. S RAM का फुल फॉर्म क्या होता है ?

S - Static

RAM - Ram

23. SCSI का फुल फॉर्म क्या होता है ?

S - Small 

C - Compuer

S - System

SI - Interface Port

24. TCP/IP का फुल फॉर्म क्या होता है ?

T - Transmission

C - Control

P - Protocol

/I - Internet

P - Protocol

25. TFT का फुल फॉर्म क्या होता है ?

T - Thin

F - Film

T - Transister


Top 50 Full form of computer- computer ka full form in hindi

26. ULSI का फुल फॉर्म क्या होता है ?

U - Ultra

L - Large

S - Scale

I - Integration

27. UNIVAC का फुल फॉर्म क्या होता है ?

UNIV - Universal

A - Automatic

C - Compuer

28. UPS का फुल फॉर्म क्या होता है ?

U - Uninterruptible

P - Power

S - Supply

29. URL का फुल फॉर्म क्या होता है ?

U - Uniform

R - Resourse

L - Locator

30. USB का फुल फॉर्म क्या होता है ?

U - Universal

S - Serial

B - Bus

31. VDU का फुल फॉर्म क्या होता है ?

V - Visual

D - Display

U - Unit

32. VLSI का फुल फॉर्म क्या होता है ?

V - Very 

L - Large

S - Scale

I - Integration

33. VSNL का फुल फॉर्म क्या होता है ?

V - Videsh

S - Sanchar

N - Nigam

L - Limited

34. WAN का फुल फॉर्म क्या होता है ?

V - VWde

A - Area

N - Network

35. WIMAX का फुल फॉर्म क्या होता है ?

W - Wordwide

I - Interoperability for

M - Microwave

A - Access

36. WLL का फुल फॉर्म क्या होता है ?

W - W - Wireless

L - Local

L - Loop

37. WORM का फुल फॉर्म क्या होता है ?

W - Write

O - Once

R - Read

M - Many

38. WWW का फुल फॉर्म क्या होता है ?

W - World

W - Wide

W - Web

39. VIRUS का फुल फॉर्म क्या होता है ?

V - Vital

I - Infomation

R - Recource

U - Under

S - Seized

40. 3G का फुल फॉर्म क्या होता है ?

3 - 3rd

G - Generation

41. GSM का फुल फॉर्म क्या होता है ?

G - Global

S - System for

M - Mobie communication

42. CDMA का फुल फॉर्म क्या होता है ?

C - Code

D - Division

M - Multiple

A - Access

43. UMTS का फुल फॉर्म क्या होता है ?

U - Universal

M - Mobile

T - Telecommunication

S - System

44. SIM का फुल फॉर्म क्या होता है ?

S - Subscribe

I - Identity

M - Module

45. AVI का फुल फॉर्म क्या होता है ?

A - Audio 

V - Video

I - Interleave

46. RTS का फुल फॉर्म क्या होता है ?

R - Real 

T - Time

S - Streaming

47. SIS का फुल फॉर्म क्या होता है ?

S - Symbian OS

I - Installer File

48. AMR का फुल फॉर्म क्या होता है ?

A - Adaptive

M - Multi

R - Rate Codec

49. JAD का फुल फॉर्म क्या होता है ?

J - JAVA

A - Application

D - Descriptor

50. AAC का फुल फॉर्म क्या होता है ?

A - Advanced

A - Audio

C - Coding


I hope like it-- Top 50 Full form of computer- computer ka full form in hindi


Tags:-

1. computer ka full form
2. computer ka full form kya hai
3. computer full form
4. computer full form list
5. computer full form list pdf
6. cpu ka full form
7. computer ka hindi name

8. computer full form in hindi