रविवार, 6 सितंबर 2020

कंप्यूटर नेटवर्क के विभिन्न कम्पोनेंट्स- components of computer in hindi

 

components of computer in hindi

कंप्यूटर नेटवर्क के विभिन्न कम्पोनेंट्स- components of computer in hindi

कंप्यूटर नेटवर्क के सम्बन्ध में अध्यन से पूर्व उससे सम्बंधित कुछ महत्वपूर्ण कम्पोनेंट्स का ज्ञान होना आवश्यक है |

(1) सर्वर –

नेटवर्क के मुख्य कंप्यूटर को सर्वर कहते है | यह सेन्ट्रल कंप्यूटर होता है | और इसी से सभी कंप्यूटर जुड़े होते हैं | सर्वर के द्वारा ही कंप्यूटर नेटवर्क के प्रोग्राम को आपरेट किया जाता है |

(2) नोड –

नेटवर्क के सर्वर से जुड़े प्रत्येक कंप्यूटर को नोड कहते हैं | प्रत्येक नोड का एक निश्चित नाम अथवा पहचान होती है |

(3) क्लाइन्ट –

इसका अभिप्राय नेटवर्क पर कार्य कर रहे कंप्यूटर से है | यह एक कंप्यूटर क्लाइन्ट की भूमिका निभाते हुए दूरदर्शी स्थानों पर स्थित सर्वर के साथ इनफार्मेशन व फीचर्स का साझा उपयोग करता है |

(4) केबल –

नेटवर्क में कंप्यूटर को आपस में जोड़ने वाले तारो को केबल कहते हैं | यह ट्विस्टेड पेयर अथवा कोएक्सियल तथा फाइबर आप्टिक प्रकार की हो सकती हैं |

(5) टोपोलॉजी –

कंप्यूटर नेटवर्क में कंप्यूटर को जोड़ने की व्यवस्था को टोपोलॉजी कहते हैं | कंप्यूटर नेटवर्क की अनेक टोपोलॉजी होती हैं | इनके बारे में आगे विस्तार से बताया जायेगा |

(6) हब –

नेटवर्क में अलग-अलग कंप्यूटर के केबल को एक साझे सेंटर से जोड़ने का कार्य हब के द्वारा किया जाता है | यह एक आयताकार बाक्स होता है | जिसमे प्लग या जैक लगाने के लिए स्लॉट बने होते हैं जिन्हें पोर्ट कहा जाता है |

(7) नेटवर्क ऑपरेटिंग सिस्टम  -  

नेटवर्क ऑपरेटिंग सिस्टम को संक्षेप में नॉस के नाम से जाना जाता है | यह एक प्रकार का ऑपरेटिंग सिस्टम है जो लोकल एरिया नेटवर्क से कंप्यूटर तथा अन्य डिवाइसेस को जोड़ने के लिए कुछ विशेष फंक्शन रखता है | कुछ ऑपरेटिंग सिस्टम जैसे यूनिक्स में नेट्वर्किंग फंक्सन पहले से ही उपस्थित होते हैं |

नेटवर्क ऑपरेटिंग सिस्टम शब्द का प्रयोग सामान्यतः एक जैसे साफ्टवेयर के लिए किया जाता है | जो एक फंडामेंटल ऑपरेटिंग सिस्टम में नेट्वर्किंग प्रोपर्टीज को जोड़ता है | माइक्रोसोफ्ट विंडोज सर्वर तथा विन्डोज एन. टी. नेटवर्क ऑपरेटिंग सिस्टम के उदहारण हैं |

(8) एन. आई. सी. –

एन. आई. सी. का विस्तरित नाम नेटवर्क इंटरफ़ेस कार्ड होता है | नेटवर्क इंटरफ़ेस कार्ड एक प्रकार का एक्सपेंशन बोर्ड होता है | जो कंप्यूटर के साथ कम्बाइन करके उसे एक नेटवर्क से जोड़ देता है | अधिकतर नेटवर्क इंटरफ़ेस कार्ड एक विशेष प्रकार के नेटवर्क, प्रोटोकॉल तथा मीडिया के लिए डिजाइन किए जाते हैं | याद्यापि कुछ कार्ड कई असमान नेटवर्क में भी प्रयोग किए जाते हैं |

(9) प्रोटोकॉल –

कंप्यूटर नेटवर्क सुचारू रूप से कार्य करते रहे इसके लिए नेटवर्क में उपस्थित इनफार्मेशन को; जिन्हें कंप्यूटर की भाषा में Data Traffic कहते हैं; कुछ नियमो का पालन करना पड़ता है | जिन्हें प्रोटोकॉल कहते हैं | प्रोटोकॉल के पालन के द्वारा नेटवर्क का प्रत्येक कंप्यूटर एक दूसरे को मेसेज भेज सकता है | एक दूसरे में स्टोर प्रोग्राम तथा डाटा के प्रयोग के साथ-साथ उनसे जुड़े डिवाइसेस का प्रयोग कर सकता है |

(10) ब्रिज –

इसके माध्यम से दो लोकल एरिया नेटवर्क (LAN) को आपस में केवल तब जोड़ा जा सकता है | जबकि उनके साफ्टवेयर एक समान हो तथा कंप्यूटर असमान हो | एक बार जब ब्रिज के माध्यम से दो लैंस (LAN’S) को आपस में पोर्ट के माध्यम से जोड़ दिया जाता है तो विभिन्न डिवाइसेस आपस में आसानी से जुड़ जाती हैं | ब्रिज विशेषतया डाटालिंक स्तर पर कार्य करता है |

नोड्स की संख्या जब अधिक होती है | तब डाटा स्थान्तरण की गति कम हो जाती है | इस स्थित में ब्रिज का प्रयोग का विभिन्न लैंस को आपस में जोड़ा जाता है | फलस्वरूप डाटा स्थान्तरण की गति तीव्र हो जाती है |

(11) रूटर्स –

रूटर्स का प्रयोग तब किया जाता है जब अत्यंत जटिल नेटवर्कों को आपस में जोड़ना होता है; जैसे – इंटरनेट प्रोटोकॉल इसके माध्यम से यदि डाटा भेजना है तो एकसमान प्रोटोकॉल का होना आवश्यक है | रूटर, कंप्यूटर व उनमे स्थित साफ्टवेयर भिन्न-भिन्न होने पर भी कार्य कर सकता है | यह ब्रिज की तुलना में अच्छा कार्य करता है | यह डाटा ट्रान्सफर के लिए छोटे रास्तों का चयन करता है | जिससे कम से कम समय में अधिक कार्य कर सके |

(12) रिपीटर –

जब इनफार्मेशन के सिग्नल एक स्थान से दूसरे स्थान पर भेजे जाते हैं तो सिग्नल्स दुर्बल हो हेट हैं | उन्हें संव्धित करने के लिए रिपीटर का प्रयोग किया जाता है | एक नेटवर्क से प्राप्त सिग्नल रिपीटर द्वारा दूसरे नेटवर्क को भेजते हैं | यह सिग्नल डाटा या साउंड के रूप में हो सकते हैं | रिपीटर सामान्यतः बिट स्तर पर कार्य करता है | रिपीटर दो नेटवर्क के मध्य एक सामान कार्य कर सकता है | जबकि दोनों नेटवर्क की कार्य प्रणाली एक समान हो; अर्थात कंप्यूटर व् उसमे स्थित सोफ्टवेयर एक समान हो |

(13) गेटवे –

गेटवे की कार्य प्रणाली रूटर्स से उच्च स्तर की होती है | यह दो भिन्न प्रकार के नेटवर्कों को भी आपस में कम्बाइन कर सकता है | यदि आपके पास ऐसा नेटवर्क है जिसके विभिन्न उपखंड हैं, जैसे एक आपके पास उनिक्स का सिस्टम है | और दूसरा विंडो का, तब इनके बीच नेट्वर्किंग के लिए गेटवे का प्रयोग किया जाता है | गेटवे एक ऐसा सिस्टम है | जिसमे विशेष प्रकार के हार्डवेयर व साफ्टवेयर होते हैं |



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