रविवार, 1 नवंबर 2020

इन्टरनेट कैसे चलता है - internet kaise chalta hai

internet kaise chalta hai


दोस्तों आजकल हम सब बहुत सारी सोशल मिडिया का यूज़ करते हैं | जैसे फेसबुक, गूगल, youtube, instagram | इन पर लाखों GB का डाटा अपलोड हो रहा है | डाउनलोड हो रहा है | ये सब कैसे हो रहा है | क्या आपको पता है कि youtube पर हर मिनट 400 घंटे की विडियो अपलोड हो जाती है | इन्टरनेट आज की दुनिया में बहुत बड़ा बन चुका है | और यह हमारे लिए बहुत उपयोगी हो गया है |

अगर सामान्यतः देखा जाये तो इन्टरनेट आज के समय में हमारी जरूरत के साथ-साथ आदत भी बन चुका है | लेकिन क्या आपको पता है कि इन्टरनेट कैसे चलता है | यह सब कैसे संभव हो पाता है | कोई एक चीज सोशल मीडिया पर किसी देश में अपलोड होती है | लेकिन सभी देश उसे आसानी के साथ कैसे देख पाते हैं | आखिर सभी देशो के बीच क्या सम्बन्ध है | आज हम आपको बताने वाले हैं कि इन्टरनेट क्या है कैसे चलता है, हिस्ट्री और बहुत सारी जानकारियों के बारे में बात करूंगा |

इन्टरनेट एक ग्लोबल नेटवर्क है | जोकि बहुत सारे कंप्यूटर और डिवाइस को एक दूसरे से जोड़ता है | इन्टरनेट के माध्यम से दुनिया में कही भी स्थित कंप्यूटर एक दूसरे से डेटा का आदान-प्रदान कर सकते हैं | जब दो या दो से अधिक कंप्यूटर आपस में जुड़ते हैं जो उसे एक नेटवर्क कहते हैं | अब जैसे स्कूल, बैंक, सरकारी बहुत सारे नेटवर्क होते हैं | जिनको इन्टरनेट आपस में जोड़ता हैं |

इन्टरनेट का इतिहास

1957 में रूस ने सबसे पहले इन्टरनेट का सेटेलाइट लाँच किया था | इसके बाद अमेरिका ने युद्ध जैसे हालत से निपटने के लिए एडवांस्ड रिसर्च प्रोटेक्ट एजेंसी की स्थापना की | इसके बाद डर्पा ने रिसर्च करके अर्पानेट नामक एक कोम्युनिशन सिस्टम बनाया | विन्सेप और रोबट ने मिलकर डर्पा की मद्द के लिए TCPIP प्रोटोकॉल बनाया | दोस्तों विन्सेप और रोबट को ही इन्टरनेट का अविष्कारक कहा जाता है |

आप के मन में अब भी बार-बार यह सवाल आ रहा है कि इन्टरनेट कैसे चलता है | तो अपको बता दें कि इन्टरनेट केबल्स के जरिये चलता है | 99% इन्टनेट इन्ही केबल्स के जरिये चलता है | बाकी 1% इंटरनेट मईनेसेटेलाइट के जरिये चलता है | यह केबल पूरी प्रथ्वी पर बिछी हुई है | इस केबल का दूसरा नाम ऑप्टिकल केबल्स फिबेर्स होता है | यह केबल कांच की बनी होती है |

और इसका आकर मानव शरीरके बाल जितना होता है | तो आपका जितना भी डेटा और इनफार्मेशन होता है | वह सब इन्ही बाल जैसी पतली केबल्स के माध्यम से जाता है | मतलब कि ये जो आप यह जानकारी हमारी वेबसाइट पर पढ़ रहे हैं | यह इन्ही केबल्स के माध्यम से आप तक पहुँच रही है |

आब आप सोंच रहे होंगे कि इस केबल्स को किसने और कैसे बिछाया है | तो इन केबल्स को देश की बड़ी-बड़ी प्राइवेट कंपनियों ने अपने पैसे लगाकर बिछया है | भारत में इन्टरनेट की सुरुआत सन 1986 में हुई थी | जोकि केवल शिक्षा और स्रोत के काम आती थी | 14 अगस्त 1995 को उस समय की सबसे बड़ी टेलिकॉम कंपनी विदेश संचार निगम लिमिटेड ने आम नागरिको के लिए भी लाँच किया | उस समय दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, चेन्नई जैसे बड़े शहर के लोग इन्टरनेट को एक्सेस कर सकते थे |

उस समय इन्टरनेट की स्पीड 916 kb प्रति सेकेण्ड होती थी | और केवल 10 दिनों के लिए लगभग 1000 रूपये का चार्ज किया जाता था | इसके बाद 1 अक्टूबर 2000 को बेअस्नल की स्थापना हुई थी | फिर भी इन्टरनेट पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा | इसके बाद 2004 में सरकार ने ब्रोड बेन पालिसी बनाई | जिसके बाद इन्टरनेट की स्पीड 256 kb प्रीति सेकेण्ड हो गई थी | लगभग 8 साल ऐसे ही चलता रहा | इसके बाद 10 अप्रैल 2012 को एयरटेल ने 4G सर्विसेस की सुरुआत की थी | तब से इन्टरनेट में चार चाँद लग गए | इसके बाद सारी कंपनियों ने इसी रस्ते पर चलना सुरू कर दिया | और सभी कंपनियों ने 4G सर्विसेस को लाँच कर दिया |

इसके बाद 5 सितम्बर 2016 को मुकेश अम्बानी ने जियो जैसी रिलैंस कम्पनी को लाँच करके सभी कंपनियों को पीछे छोड़ दिया |

अब आप सोंच रहे होंगे कि इन्टरनेट का मालिक कौन है | इस सवाल का जबाब थोडा मुस्किल है | क्योकि इन्टरनेट का मालिक कोई एक पर्सनल व्यक्ति नही हो सकता | एक तरह से देखें तो इन्टरनेट एक विशाल नेटवर्क है | जोकि बहुत सारे स्ट्रक्चर से मिलकर बना है | इसलिए इन सब का मालिक एक होना असंभव है | अगर इन सभी विशालकाय नेटवर्क के हिसाब से देखे तो इसके कई सारे मालिक हो सकते हैं | क्योकि इन्टरनेट को चलने के लिए ऑप्टिकल केबल्स, डोमेन, सर्वर, होस्टिंग आदि की जरूरत पड़ती है | जिसके सब अलग-अलग मालिक होते हैं |

तो उम्मीद करता हूँ कि आज आप जान चुके होंगे कि इन्टरनेट कैसे चलता है | और इसका कौन मालिक है |


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